Phone: +91-947-224-1383 Email: info@pwcbed.org

हिन्दी के विकास में लोकभाषाओं की भूमिका पर डॉ. तरुण कुमार का अतिथि व्याख्यान

पटना वीमेंस कॉलेज (स्वायत्त) के शिक्षा विभाग द्वारा हिन्दी पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत 12 सितम्बर 2026 को ‘हिन्दी के विकास में लोकभाषाओं की भूमिका’ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. तरुण कुमार, सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय थे। वे मानविकी संकाय के पूर्व संकायाध्यक्ष तथा पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य भी रह चुके हैं।

डॉ. तरुण कुमार के अतिथि व्याख्यान की तस्वीरों का कोलाज
हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत अतिथि व्याख्यान की झलकियाँ, 12 सितम्बर 2026।

अपने व्याख्यान में डॉ. कुमार ने हिन्दी के विकास में लोकभाषाओं और बोलियों के योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भाषाएँ और बोलियाँ गाँवों तथा जनजीवन में विकसित होती हैं और व्यापक सामाजिक तथा शैक्षिक उपयोग के साथ उनका स्वरूप परिष्कृत होता है। इस संदर्भ में उन्होंने हिन्दी को अनेक बोलियों से समृद्ध भाषा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने उर्दू के लिए प्रचलित पुराने नाम ‘रेख़्ता’ का भी उल्लेख किया।

लोकसाहित्य की चर्चा करते हुए उन्होंने गाँधी और लेनिन के विचारों का संदर्भ दिया। उन्होंने लोकसाहित्य को सामान्य जन के जीवन, आशाओं और आकांक्षाओं से जोड़कर देखा तथा इसमें महिलाओं के योगदान की ओर भी ध्यान दिलाया। इस क्रम में भिखारी ठाकुर की ‘बिदेसिया’ का उल्लेख हुआ।

डॉ. कुमार ने भाषा की समझ और अभिव्यक्ति में मुहावरों तथा लोकोक्तियों का महत्त्व बताया। रसेल के नाम से उद्धृत एक कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहावतों में सामूहिक अनुभव और किसी एक व्यक्ति की सूझ के मेल पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को भाषा के साहित्यिक रूप के साथ उसके लोकप्रचलित प्रयोग पर भी विचार करने का अवसर मिला।

डॉ. तरुण कुमार का पौधा भेंट कर अभिनन्दन
अतिथि वक्ता डॉ. तरुण कुमार का अभिनन्दन।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीतू चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने अतिथि वक्ता, शिक्षकों और प्रशिक्षु शिक्षिकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। व्याख्यान ने हिन्दी तथा लोकभाषाओं के संबंध और लोकसाहित्य की महत्ता पर संवाद को आगे बढ़ाया।